दिल


चाह  कर भी न कह सके जो बात रह गयी दिल में छुपी ,
कभी हलकी सी रौशनी में  सोचु  ,वो बाहर न आये कहीं,
चेहरे पे बयां कर दे तो …किस कदर समझाऊ मै उनको ,
की नहीं समझता है ये  दिल हमारी उलझन को!

अपने ही में रहता वो,
न देखे ज़माने की रुसवाई को,
छ लका  देता कुछ बूँदें ये अपने बेबसी की,
गर न दिखे  इसे कोई उम्मीद प्यार पाने की !

हम तो समझ जायेंगे ,
तुम्हारे अफ़साने को,
इस दिल को कौन बताए ,
की मिटा दे वो अपने अरमानो को !

images

 

7 विचार “दिल&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s