भाषा

भिन्नता में हम है जिते  जैसे रंग कई  गुलाल के
फिर भी दिल को जोड़े रखे यह हिंदुस्तानी भाषा हमारी,
घूम आए दुनिया के कोने ,
ना देखि ऐसी मधुर वाणी,
जिसमें बयान कर सके
हम अपने अस्तित्व के अस्मिता की कहानी ! 
जहाँ देवताओं कि बोली समझे 
पशु पक्षी और यह पर्वत
उस देश कि भाषा है निरालि 
कहते यह धरती और अंबर!!!

 

3 विचार “भाषा&rdquo पर;

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