ज़ुबान

जब एक झलक दिखी उस चाँद की
तो: दिल में एक  टीस उठी,
जागे हुए अरमान मचल  गए
सोयी सी  तक़दीर जाग उठी!

बंद करके पंखुरियों को
जब हम ने बना ली अपनी ज़ुबान
तरन्नुम प्यार के गाने लगे
यह धरती और आसमान!

 

दिल की पंखुरियां

 

 

कभी इस दिल के पंखुरियों से पूछों,
मुरझ गयी तेरे इंतज़ार में,
राह तकते सुबह शाम,
 किस पल मिले इसे थोडा सुकून।
 
 
सुर्ख हवाओं से सिमटी,
गरम फिजाओं  में झुलसती,
चंद लम्हे ढूंढ़ती
यह सुहाने बसंत की ।
 
 
उस मनोहर स्पर्श के इंतज़ार में,
कोमल मनोरम दृश्य के,
जब हर एक पंखुरी बिखरे ,
मुस्कराहट अपने शरमाई सी हंसी  के
 
 
 
 

चाँद !

ढलते हुए सूरज ने कहा,
ऐ ! चाँद आ अब तू कर रोशन यह जहाँ ,
बिखेर कर अपनी चांदनी यहाँ,
बाँध ले यूँ अपना समां !
 
यह रात है  चार पहर की,
जला के अंधियारों  में दिए,
तू बन जा इस जहाँ का
सब से प्यारा मितवा!
 
फिर सुबह की किरणों से,
यह खो जाएगा आसमान,
जहां चाँद होता है ज़मीन पर ,
तारे जगमगाते  आसमान !