MUSKAAN

चुपके से आई है किरणों के सहारे ,
यह प्यारी सी मुस्कान जो खोयी थी किनारे ,
चलते चलते जम तुम चले कहीं और ,
ले गए थे तुम्हारे साथ हमारे हंसने की डोर .
कई दिनों बाद आज सूरज है निकला ,
बादलों के पीछे से उजाला है चमका ,
हलकी सी मुस्कान इन होठों पर आई है,
जब कई दिनों बाद इस दिल को तुम्हारी याद आई है .
कहीं से आज एक मस्त झोंखा चला है ,
उड़ा के मेरा आँचल हवा में वोह बहका है,
साथ अपने उसने तुम्हारी खुशबु लायी,
आज कई दिनों बाद होंठों पर हंसी आई है