चलते रहना!

जज्बा लिए इस दिल में जब उठते  है कदम ,
मंजिल भी नज़र आती है ,
चाहे हो मीलों दूर अगर !
 
बिना रुके बिना थमे ,
कांटो प् चलना है अगर,
तो डर को  क्यूँ जगह दे मन में ,
जो बढ़ा  देता है फासले मंजिल की अगर!
 
 
गिरना,उठना,
ये तो है इस राह के हमसफ़र,
डरता क्यूँ है ऐ दिल,
जब थामने वाला हो साथ अगर!
 
 
चाहे हो नदी,या हो पर्वत,
आंधी में हो चलना या हो अंधेरा चमन,
विश्वास के दिए को जलते रख कर,
तू बस चल अपनी डगर!
 
बीच मजधार गर फँस जाओ  कहीं ,
याद रखना ऐ हमसफ़र,
एक हाथ साथ है तुम्हारे,
हर वक़्त,हर  पल, शामोसहेर !