कश्मीर

वह पृष्ठभूमि ,है हमारी तक़दीर
सियासत की खुनी लड़ाई में
ज़िन्दगी की बन गयी भद्दी तस्वीर
गर बहा ले जाए झेलम की लहरें
इन नफरत के शोलों को
फिर से ऐ! फ़िरदौस
बन जाएगी जन्नत यह तुम्हारी ज़मीन!

इस धरती

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मुद्दत से अक्सर राह देखती है आँखें
उस सुनहरे भविष्य पर
जब इस धरती के फूल खिलेंगे
चारो ओर अम्बर पर। ।

जब ना होगा कोई भ्रष्टाचार
ना कोई किसी का गला काट
ना रास्तों पर चलने को
डरेंगी बहनें हज़ार।

जब हर एक कोने से गूंजेगी
एक वाणी ,एक ही आवाज़
ना भेद करेंगे लोग यहाँ के
रंग ,जाती व  धर्म का घिनौना व्यापार।

ऐसे सुन्दर सजग स्वप्न में
मैं  जियूं हज़ारों साल
हर एक जन्म यही हो मेरा
इस धरती पर जहाँ होगा
एक राज्य का स्वर्णिम काल!