श्रद्धा

अगर लगे अंधकारमय है पथ जीवन का,
दूर तक ना हो रोशनी का कोई निशान ,
डर ना नहीं बस चलते रहना ऐ ! इंसान
एक किरण  भी ले जायेगी तुम्हे तारों के पार।

मन में रख तू विश्वास बनाये
गिर कर भी तू संभलना जाने
फिर काहे का डर सताए
इस पथ तो है वीरों के साए ..

सच्चाई की इस डगर पर
लाखों ने  अपने शीश झुकाए,
अपने मंजिल की ओर बढा  कर कदम
चलते जा तू यूँ ही निरंतर …
दिखेगा लक्ष्य तुझे
अगर रहे नज़र
अटल निश्चल !

अनदेखी सी शक्ति होगी ,तेरे  हर कदम  के तले ,
जो उठा लेगी हाथों में ,अगर कहीं कांटे मिले,
रख कर यह श्रद्धा का दीपक, हाथ में तू चला अगर ,
दूर नहीं कोई भी मंजिल, पहुंचेगा तू , सितारों के परे …