दोस्त

इस ज़र्रा नवाज़ि  पर मैं क्या कहूँ ,
जब कभी आपके लब्ज़ो ने फर्माया
ज़िक्र मेरा
दिल ठहर कर मचलने लगा
कि लो आ गया है किसी चमन से

वो दोस्त तेरा
जो खिला देगा गुलशन के सारे फूल यहाँ !

दूर कहीं से जब चली यह हवा
घटाओ ने थामाँ था यूँ आँचल मेरा
बारिश कि बूँदों में बरस गया
उस दोस्त कि आँखों में सारा जहाँ !

This few lines dedicated to few special friends whose words do influence me!

For these naturally got expressed while communicating with  Shaheen..http://wp.me/p1Wrvn-vl

Suraiya

Shaheen

…Of Fire & Clay.

Shilpi Mata Ke Nau Roop.

Rachna