वो लम्हे प्यार के!

  अर्जी दी थी हमने भी मगर,ना उसपर कोई करवाई  हुई ,
बैठे रहे तेरे कुचे में आकर ,उम्र यूँ गुजरती गयी,
देखते ही देखते आँखों के चंद लब्ज़ …
बसा गए सपनों का जहां,
मगर हकीकत बनने से पहले
वो चंद लब्ज़ , इतिहास में समा गए।

राह पर तेरी हम फूल बीछा गए,
इत्र के बदले अपने प्यार की कुछ बूँदें छलका गए,
इस उम्मीद में , की,
जब कभी गुजरे तुम्हारी हस्ती
इस राह से,
याद दिला  दे तम्हारे दिल को …
वो लम्हे प्यार के!

ये  हवा की नमी ,चंद बारिश की बूँदें,
गवाह रहे इस तरन्नुम के,
की ज़िन्दगी निकाल  दी  यूँ,
हमने तेरे दर पे,
जाते जाते
सजा गए  गुलशन को तेरे ,
हम  अपने रंग से!
हो सके महसूस कर लेना
वो लम्हे प्यार के!

(photo:shaansepoetry.ucoz.com)

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