वह सोचते हैं

गम उन्हीं की कश्ती का हमसफर है

कौन समझाए हमने तो

जुबान पर मुसकुराहट पहनी है

गर बयान करे हाल ए दिल

तो तुफान आजाए

कश्ती हमारी तो पहले से

मझधार में फँसी है.

©soumya

Advertisements

फुरसत

मेरी आँखों की गहराई में
झांकने की तुझे फुरसत कहाँ
जश्न -ए -ईद
मौसम -ए- मातम
में बस य़ुहीं गुज़र गयी
दीद की रात

© सौम्या

यह खामोशी कैसी

DSCF5354.JPG

वह जो बैठे हैं
हथेली पर चंद पलों को लिए
उम्र गुज़र गयी ,तरस गयी आँखें
एक दरस के लिए
शाम सुर्ख फिर भी
फूल यूँ ही मुरझा गए

वक़्त की बेड़ियों ने बाँधी
यह खामोशी कैसी
चलो फिर इंतज़ार करे
यूँ ही चाँद का
सितारों के परे आसमान में

©All rights reserved SoumyaVilekar

कैसे कहे चाँद से

कैसे कहे चाँद से

रात की चांदनी उससे  अलग नहीं

चाहे हो दिन या सितारों का मज़मा

रौशनी रूह की

जलती है अंदर ही

 

©Soumya

जुबां हमारी ना समझ सका है कोई
आँखों की गहराई
जानने की
फुर्सत किसी को नहीं

मेरे दिल को चिर कर

वह सोचते रहे

यूँ ही रात भर

पर हम ना

इससे बेखबर

लम्हा दर लम्हा गुज़रे

जो यह पहर

अलफ़ाज़ उनके जाए

मेरे दिल को चिर कर

सुन लो

जो सब कुछ कह दूँ
तो क्या मज़ा जीने में
समझ सको तो सुन लो
बिन कहे
उन बूंदों की सरगम
बहती है जो ख़ामोशी से
हलके से
गुनगुनाते हुए
बरसात के कुछ नग़मे
किस्से तेरी और मेरी कहानी के !

©Soumya

IMG_20161029_173609