• लिहाफ

    रफ्ता रफ्ता यह ख्याल आता है दिल में इस गुलाबी ठण्ड के ठिठुरते पलों में सिली सिली यादों का एक मखमली लिहाफ ओढ़ लूँ कुछ पल के लिए कुछ सेंक लूँ, बर्फ से हालत कुछ ताप लूँ ,अपने जज़्बात फिर मिलते है ,अगले मौसम में… Read more

  • खोज

    चंद पल सुकून के खोजता रहा उम्र भर कभी अपने पैरों के निशाँ पोंछ कर कभी परिंदे सी उड़ान भर कर दूर दराज़ जंगलों में बड़ी बड़ी इमारतों के मंज़िलों पर खोती गयी मंज़िल अपनी इस पशोपेश में भूल गया झाँकना अपने ही भीतर ज़िन्दगी… Read more

  • वह सोचते हैं गम उन्हीं की कश्ती का हमसफर है कौन समझाए हमने तो जुबान पर मुसकुराहट पहनी है गर बयान करे हाल ए दिल तो तुफान आजाए कश्ती हमारी तो पहले से मझधार में फँसी है. ©soumya Read more

  • फुरसत

    मेरी आँखों की गहराई में झांकने की तुझे फुरसत कहाँ जश्न -ए -ईद मौसम -ए- मातम में बस य़ुहीं गुज़र गयी दीद की रात © सौम्या Read more

  • यह खामोशी कैसी

    वह जो बैठे हैं हथेली पर चंद पलों को लिए उम्र गुज़र गयी ,तरस गयी आँखें एक दरस के लिए शाम सुर्ख फिर भी फूल यूँ ही मुरझा गए वक़्त की बेड़ियों ने बाँधी यह खामोशी कैसी चलो फिर इंतज़ार करे यूँ ही चाँद का… Read more

  • कैसे कहे चाँद से

    कैसे कहे चाँद से रात की चांदनी उससे  अलग नहीं चाहे हो दिन या सितारों का मज़मा रौशनी रूह की जलती है अंदर ही   ©Soumya Read more

  • जुबां हमारी ना समझ सका है कोई आँखों की गहराई जानने की फुर्सत किसी को नहीं Read more

  • मेरे दिल को चिर कर

    वह सोचते रहे यूँ ही रात भर पर हम ना इससे बेखबर लम्हा दर लम्हा गुज़रे जो यह पहर अलफ़ाज़ उनके जाए मेरे दिल को चिर कर Read more

  • सुन लो

    जो सब कुछ कह दूँ तो क्या मज़ा जीने में समझ सको तो सुन लो बिन कहे उन बूंदों की सरगम बहती है जो ख़ामोशी से हलके से गुनगुनाते हुए बरसात के कुछ नग़मे किस्से तेरी और मेरी कहानी के ! ©Soumya     Read more

  • हिज्र

    अर्ज़ मेरी उसने ना सुनी, होगा वो कुछ संगदिल सा, एक हिज्र की मोहलत माँगी थी, रूखसत हुई जब उसके दर से यह ज़िंदगी। -©Soumya Read more

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