-
वह सोचते हैं गम उन्हीं की कश्ती का हमसफर है कौन समझाए हमने तो जुबान पर मुसकुराहट पहनी है गर बयान करे हाल ए दिल तो तुफान आजाए कश्ती हमारी तो पहले से मझधार में फँसी है. ©soumya Read more
-
यह खामोशी कैसी
वह जो बैठे हैं हथेली पर चंद पलों को लिए उम्र गुज़र गयी ,तरस गयी आँखें एक दरस के लिए शाम सुर्ख फिर भी फूल यूँ ही मुरझा गए वक़्त की बेड़ियों ने बाँधी यह खामोशी कैसी चलो फिर इंतज़ार करे यूँ ही चाँद का… Read more
-
कैसे कहे चाँद से
कैसे कहे चाँद से रात की चांदनी उससे अलग नहीं चाहे हो दिन या सितारों का मज़मा रौशनी रूह की जलती है अंदर ही ©Soumya Read more
-
जुबां हमारी ना समझ सका है कोई आँखों की गहराई जानने की फुर्सत किसी को नहीं Read more
-
मेरे दिल को चिर कर
वह सोचते रहे यूँ ही रात भर पर हम ना इससे बेखबर लम्हा दर लम्हा गुज़रे जो यह पहर अलफ़ाज़ उनके जाए मेरे दिल को चिर कर Read more