खोज

चंद पल सुकून के खोजता रहा उम्र भर
कभी अपने पैरों के निशाँ पोंछ कर
कभी परिंदे सी उड़ान भर कर
दूर दराज़ जंगलों में
बड़ी बड़ी इमारतों के मंज़िलों पर
खोती गयी मंज़िल अपनी
इस पशोपेश में
भूल गया
झाँकना अपने ही भीतर
ज़िन्दगी के घुमते पहिये संग

Soumya

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सुन लो

जो सब कुछ कह दूँ
तो क्या मज़ा जीने में
समझ सको तो सुन लो
बिन कहे
उन बूंदों की सरगम
बहती है जो ख़ामोशी से
हलके से
गुनगुनाते हुए
बरसात के कुछ नग़मे
किस्से तेरी और मेरी कहानी के !

©Soumya

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आओ चांदनी तुम्हे चुरा लूँ

“आओ चांदनी तुम्हे चुरा लूँ
उस चाँद से,
जो पढ़ता है कसीदे रात के अँधेरे में
अपनी मोहब्बत के
गुलाब की उन बंद पंखुरियों से
वह भीनी खुशबु को उड़ा लूँ
हवा के झोंके संग
लहरा कर तुम्हारे नीले दुपट्टे को
नदी तालाब सा बहा लूँ
संग पंछी उड़ जाऊं ऊँचे पर्वत पर
और फ़िज़ा में तुम्हे
घोल दूँ इत्र बन “

कहता है आज बरामदे
पर खड़ा उगता सूरज
भीनी भीनी रौशनी में
मुस्कुराता सूरज

यह दीवारें

क्या लिखा है
दीवारों और दरख्तों पर
कुछ किस्से
कुछ सबूत
उस पुराने इतिहास की
जिसकी न मैं गवाह ना तुम

रंग उतरे इन स्तंभों पर
कई कहानियाँ जागती
इधर उधर
रात के पहर
अनायास ही नज़र पड़ी जब उन पर
सोचने लगा मन
क्या कहना चाहती है
यह दीवारें सालों से खड़ी
जीती जागती ,
मूक दर्शक बनकर !

“जोगी दे नाल “- एक नया सुरीला सफर

आज आप सभी को  एक खुशखबरी देनी है . मेरी नई कंपनी औदुम्बर आर्ट्स का पहला गाना आज Zee म्यूजिक के YOUTUBE Channel पर release  हुआ.
कृपया इसे देखे और पसंद हो तो शेयर करे .

पंजाबी में लिखा हुआ “जोगी दे नाल ” यह एक सूफी गाना है  , जिसकी धुन आधुनिक संगीत की तर्ज़ पर बनायीं गयी है।

सूफी संगीत ने अरसों से अलग अलग भाव एवं अंदाज़ देखे और अपनाए है। रॉक हो या पॉप,फ्यूज़न हो या फिर क़व्वाली ,इसको जिस अंदाज़ में पेश किया , सूफी गीतों ने अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है।

यह गीत बॉलीवुड के गीतकार अलोक रंजन झा ने अपनी जादुई कलम से लिखा है , जिनकी हाल ही मैं फिल्म “शोरगुल” में भी गीत “बारूदी हवा ” काफी मशहूर हुआ। यह अभी “जय भीम ” गाने के लिए भी पुरस्कृत हुए हैं।

गाने की धुन विवियन वैद्य ने बनायीं है ,जो कई सालों तक देश की नौसेना के लिए काम कर चुके हैं। इन्हे आठ वाद्यों में महारथ हासिल है और इनका अपना रॉक बैंड “फ्यूज़न ट्रिक्स”गोवा में काफी प्रसिद्ध है।

जोगी दे नाल में आवाज़ कौशिक कश्यप की है, जो की असमिया फिल्मों में गान गए चुके है और काफी शोज भी कर चुके हैं। यह अभी तक अली खली मिर्ज़ा  जो की बिग बॉस के प्रतिभागी रह चुके हैं, उनके साथ काम करते थे।

जोगी दे नाल का गीत विशेष रूप से युवा वर्ग को मन्दे नज़र रखते हुए किया गया है।इस गीत में कई वाद्यों का प्रयोग किया है ,  इस की ताल और तर्ज़ आधुनिक संगीत  पर  आधारित है और इसमें उपयोग हुए गिटार एवं सैक्सोफोन में  डेविड सिंचुरी और आय डी राव ने अपना कमाल दिखाया है, जो की ऍम टी वी इंडीज और ऍम टी वी कोक स्टूडियो में प्लेयर्स है।

एक ख्वाब है

एक ख्वाब है :
एक पल का
जब साथ हो आपका
किसी ठंड सी  ठिठुरती रात में
बातों का फलसफा लिए
कुछ हम कहे
कुछ आप कहे
चाँद जब दिखे आसमान में…
एक पल जिये
क्या कभी यह दिन आएगा
क्या  मन एक पल  जी पायेगा
वक्त के तरकश  से
क्या कभी यह तीर निकाल पायेगा?

अपने अपने हिस्से का आसमान

वो नीला आसमान ,
कुछ तेरा , कुछ मेरा
बाँट लिया आपस में
हमने अपने हिस्से का आसमान
कई रंग के ख्वाब यहाँ …
जीने के हजारों मक़ाम…

तेरी जेब में दुनिया को खरीदने का सारा सामान
मैंने भी जोड़े चंद सिक्के ,
अपनाने कुछ ऐश ओ आराम ..

पर वो शक़्स रहता जो
खुले आसमान के तले
ना जुटा पाया कुछ सामान
ना पहचाने दुनिया उसे ,
ना अपनाये अपनों में कहाँ

छीन गयी जिसकी
एक बिघा ज़मीन
ढोये वो बोझ, गैरों का यहाँ …
वो राह् पर भूकाबैठा …
तू चटकारे लगाये यहाँ …

क्या खूब जिया तू इनसान
कैसा यह फ़ासला …
इनसान …तू
इनसान से जुदा यहाँ !

उस अनपढ़ , के हाथों
ना दी किसी ने एक
कलम और किताब
छीन लिया बचपन
थमा दी लाठी
दूर् कर
भेद कर
अलग कर
इनसान को ,
इनसान से यहाँ…
बस
बाँट लिया आपस में हमने
अपने अपने हिस्से का आसमान !